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माता की कृपा से बदलता है जीवन: नंदकिशोर पांडेय

योगमाया झांकी, नंदोत्सव की झांकी हुई प्रस्तुत, झूमे भक्त

नागपुर :

प्राचीन भारत में माता की महिमा की अनेक कथाएं हैं जिनमें साधारण मनुष्यों पर भी माता की कृपा से बड़े-बड़े चमत्कार हुए हैं। कमजोर लोग माता की कृपा से परम बलशाली हुए हैं और जड़ मूर्ख भी प्रख्यात विद्वान बने हैं। पुराणों में ऐसे कथानक भी हैं कि जिन अज्ञानियों को माता की भक्ति भी नहीं आती थी लेकिन भूलवश उनके मुख से माता के बीजमंत्रों का उच्चारण होता गया और इस बीजमंत्र ने उनका जीवन ही बदल दिया। माता भगवती नवदुर्गा और कई शक्तिपीठों के रूप में आज भी भारत में जगह-जगह साक्षात विराजमान हैं। इन शक्तिपीठों में करोड़ों लोग दर्शन करते हैं। पर जो भक्त श्रद्धापूर्वक माता का गुणगान और स्तवन करते हैं उन्हें निश्चित ही लाभ मिलता है क्योंकि वह परमशक्ति हर कहीं, हर समय हमारे भीतर और बाहर विद्यमान हैं।
यह उद्गार कथा व्यास पंडित नंदकिशोर पांडेय ने नागपुर सेवा समिति के तत्वावधान में व यजमान उमाकांत अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञानयज्ञ सप्ताह में व्यक्त किए। श्रीमद् देवी भागवत का भव्य आयोजन ‘मां शाकंुतल धाम’, कच्छी वीसा मैदान, लकड़गंज में सोमवार 19 फरवरी तक जारी है। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 2.30 से 6.30 रखा गया है। कथा में सैकड़ों भक्त कथा श्रवण हेतु पहुंच रहे हैं।
कथा व्यास पं. पांडेय ने कथा के चौथे दिवस आज सत्यव्रत, रामचरित्र, योगमाया प्रागट्य और नंदोत्सव की कथा कही। पं. पांडेय ने बताया कि प्राचीन काल में देवदत्त नाम के एक ब्राम्हण थे। उन्होंने पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया परंतु गोभिल नामक मुनि के शाप से उन्हें उतथ्य नाम का मूर्ख पुत्र उत्पन्न हुआ। यह पुत्र मूर्ख होने के कारण बारम्बार तिरस्कृत हुआ और वन में रहने लगा। इस पुत्र की विशेषता थी कि यह हमेशा सत्य बोलता था। वह बोलना भी न सीख पाया था बल्कि सिर्फ पशुओं की तरह ‘ऐं-ऐं’ रटता था। यह भगवती का बीजमंत्र होने के कारण उन पर देवी की कृपा हुई और वह सत्यव्रत के रूप में विद्वान हो गए।
पं. पांडेय ने बताया कि परमशक्ति देवी की कृपा गोपालकों पर भगवती योगमाया के रूप में हुई थी। उनका जन्म गोकुल में हुआ था। मथुरा के कारावास में जब वसुदेव और देवकी से श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो वसुदेव उन्हें गोकुल में छोड़ आए और एक अबोध बालिका को उठा लाए थे। वसुदेव की आठवीं संतान समझकर कंस ने इस बालिका को मारने के लिए उपर उठाया तो वह उस पर प्रहार कर आकाश में चली गई और कंस को बताया कि तेरा काल तो गोकुल में पैदा हो चुका है। ये भगवती योगमाया सृष्टि के कल्याण हेतु भगवान के सत्य के उपर एक आवरण की भांति हमेशा विद्यमान रहती हैं। उन्हीं योगमाया से यह सारा संसार मोहित है।
त्रेता युग में राजा जनक पर इन्हीं भगवती की कृपा हुई। भगवती ने जानकी सीता के रूप में भूमि से प्रगट होकर दिव्य अवतार धारण किया था। वही सीता कठिन समय में पति का वन में भी साथ देने वाली, अशोक वाटिका में वर्षों तक प्रतीक्षा करने वाली सहनशील आदर्श नारी के रूप में प्रसिद्ध हुईं। श्रीराम उन्हीं सीता शक्ति के कारण राक्षसों का संहार करने में सफल हुए।
आज पं. पांडेय ने आदिशक्ति जगदंबा, श्रीराम चरित्र और नंदोत्सव की कथा सुनाई। इस अवसर पर नंदोत्सव मनाया गया। नंदोत्सव और योगमाया की झांकी प्रस्तुत की गई। नंदोत्सव में जैसे ही बाल कृष्ण का जन्म हुआ कथा पंडाल में खुशी की लहर दौड़ गई। माखन मिश्री की बौछार की गई। पुष्पवर्षा कर भगवान कृष्ण की झांकी का स्वागत किया गया। बधाई गीत महिलाओं द्वारा गाए गए। नंदोत्सव में सभी झूम उठे।
आज कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान उमाकांत अग्निहोत्री परिवार, थाडे़श्वरी मंदिर के महंत माधवदासजी महाराज, घनश्याम भाई ठकराल, खेमचंद पटेल, राजेश अग्रवाल, दिनेश गोयल, अरविंद पटेल, धीरूभाई पटेल, प्रमोद सिंह, सुभाष उपाध्याय, भानजीभाई रूपानी, अमित सिंह, लालजी भाई खेतानी, सुरेन्द्र साठवणे, शंकर अग्रवाल, गुड्डू सिंह, उमाशंकर तिवारी, अनिल सोमानी, रोशन तायल, ब्रम्हचारी सिंह, विमल शर्मा, जुगलकिशोर शर्मा, बबलू टेकाम, एहफाज भाई, संतोष दुबे, कैलास केडिया, संजय डागा, आत्माराम मूलचंदानी, कन्हैयालाल गुनानी, ज्योति जोशी, राधा पटेल, ज्योति पटेल, कमल खुराना, विद्या बाखरू, मोनू अग्रवाल, रेखा जोशी, दक्षा पटेल, गीता पटेल, कविता शर्मा, शिल्पा सारडा, प्रीति पटेल, हरिक्षा पटेल, ममता अग्रवाल, उमा केसान, सुनीता सिंघानिया, पूजा पटेल, रेखा भालोटिया, सपना साहू, चंद्रकला नवले, अनिता वैरागडे, सुनीता सूर्यवंशी, पुष्पा यादव आदि ने किया।
गुरुवार को देवी का प्रादुर्भाव, महिषासुर उद्धार, शुम्भ-निशुम्भ उद्वार कथा का वर्णन होगा। शाम 7 बजे से चंडीगढ़ के गायक कन्हैयाजी मित्तल द्वारा श्याम बाबा के भजनों की प्रस्तुति की जाएगी।
सभी भक्तों से श्रीमद् देवी भागवत कथा श्रवण की अपील नागपुर सेवा समिति व यजमान परिवार द्वारा की गई है। सफलतार्थ समिति के सभी पदाधिकारी व महिला मंडल प्रयासरत हैं।

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