Home / Trending / माता भगवती ही हैं सृष्टि की जननी:पंडित नंदकिशोर पांडेय

माता भगवती ही हैं सृष्टि की जननी:पंडित नंदकिशोर पांडेय

नागपुर:

मां भगवती का एक नाम जगत् जननी है। यानी वे इस जगत की मां हैं। जगत उनसे उत्पन्न हुआ है। इस जगत के सभी सजीव और निर्जीव तत्व उनके ही उत्पाद है। जब इस संसार में वायु, अग्नि आदि पंचमहाभूत नहीं थे। आकाश में ध्वनि, ब्रम्हांड में प्रकाश भी नहीं था तब भी भगवती अदृश्य परमशक्ति के रूप में विद्यमान थीं। उनकी शक्ति के भौतिक रूप में प्रगट होने से सभी लोकों और चराचर जीवों का अस्तित्व पैदा हुआ। ऐसे सभी जीवों को उत्पन्न करने के कारण ही मां भगवती को जगदंबा कहा गया है। उक्त उद्गार कथा व्यास पंडित नंदकिशोर पांडेय ने नागपुर सेवा समिति के तत्वावधान में व यजमान उमाकांत अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञानयज्ञ सप्ताह में व्यक्त किए। श्रीमद् देवी भागवत का भव्य आयोजन ‘मां शाकंुतल धाम’, कच्छी वीसा मैदान, लकड़गंज में सोमवार 19 फरवरी तक जारी है। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 2.30 से 6.30 रखा गया है। कथा में सैकड़ों भक्त कथा श्रवण हेतु पहुंच रहे हैं।


कथा व्यास पं. पांडेय ने कथा के तीसरे दिन आज देवी भागवत कथा का प्रारंभ महाभारत कथा के विविध प्रसंगों से किया। महाभारत कथा का प्रथम पर्व आदिपर्व है। इस पर्व में देवी गंगा और शांतनु के विवाह का वर्णन है। शांतनु के पुत्र देवव्रत भीष्म हुए। भीष्म भारत के इतिहास में कठोर ब्रम्हचारी, बलशाली और योद्धा के रूप में प्रसिद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि अपने पिता के लिए भीष्म ने कठोर प्रतिज्ञा ली थी। भारतीय संस्कृति में संस्कारों की शुरुआत माता-पिता की आज्ञा के पालन से ही होती है। जो बालक माता-पिता के आज्ञाकारी होते हैं उनमें दुनिया में संघर्ष करने की शक्ति विकसित होती है और वे ही प्रगति करते हैं। माता-पिता की भक्ति की कई कथाएं हमारे पुराणों में वर्णित हैं। माता-पिता के आशीर्वाद से व्यक्ति सर्वांगीण प्रगति करते हैं और सुखी रहते हैं। शाप देने पर पूरे परिवार में विपत्ति आती है। इसलिए माता-पिता के जीवित रहने पर उनकी सेवा व आज्ञा पालन और मृत्यु उपरांत श्राद्ध करना चाहिए।
भारत के इतिहास में महाभारत जीवन की वास्तविकता, मानव स्वभाव और गुण-दोषों के साथ सत्य की लड़ाई के महान ग्रंथ के रूप में जाना जाता है। जितना महान महाभारत महाकाव्य है उतने ही महान महर्षि वेदव्यास हैं जिन्होंने महाभारत को जन-जन के लिए पठन-पाठन योग्य बनाया। इस सांसारिक प्रपंच से भरे संसार की रचना भी माता भगवती ने की है। जिसने भी माता को भजा है उसे इन प्रपंचों पर विजय पाने में समर्थ हुआ है।
आज कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान उमाकांत अग्निहोत्री परिवार, विधायक कृष्णा खोपड़े, पवन पोद्यार, वेदानंद मिश्रा, देवेन्द्र राय, रमापति मिश्रा, डी.वी. सिंह, मोतीलाल बियाणी, महेन्द्र मिश्रा, मोहन पटेल, रमेश पटेल, प्रेमप्रकाश दुबे, अशोक बंसल, मधुसूदन सारडा, एम.एम. शर्मा, लक्ष्मीकांत मिश्रा, सजन अग्रवाल, श्याम सुवारानी, नवरतन सारडा, केदार साहू, शोभाराम गुरुदेव, डॉ. सुधीर गुप्ता, ओमप्रकाश बियाणी, जगदीश खेमानी, माताप्रसाद दुबे, आर.पी. सिंह, सुनील शर्मा, रामू अग्रवाल, वर्षा शर्मा, सपना जिजोतिया, संध्या जिजोतिया, सुनीता अग्रवाल, पुष्पा झलके, उर्मिला यादव, पुष्पा यादव, जीतू साहू, कस्तूरी बेन, मधुबेन मूलचंदानी, मीना चचडा, कविता शर्मा, शिल्पा सारडा, ममता अग्रवाल, वंदना भानुसाली, गायत्री सुवारानी, निर्मला बेन, अनिता रकराना, सविता बेन पटेल, ममता ओझा, दक्षा पटेल, वनिता पटेल, वीना राच्छ आदि ने किया।
बुधवार को सत्यव्रत चरित्र, रामचरित्र, योगमाया प्राकट्य, नंदोत्सव, शाम 7 बजे से जयपुर के मुकेश बागड़ा द्वारा शाम बाबा के भजन प्रस्तुत किए जाएंगे। सभी भक्तों से श्रीमद् देवी भागवत कथा श्रवण की अपील नागपुर सेवा समिति व यजमान परिवार द्वारा की गई है। सफलतार्थ समिति के सभी पदाधिकारी व महिला मंडल प्रयासरत हैं।

About admin

Check Also

सक्षम दशकपूर्ती समारोह कार्यक्रम आज

नागपूर : समदृष्टी क्षमता विकास एवम अनुसंधान मंडळ ( सक्षम ) या संस्थेला दहा वर्ष …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!